Kharinews

भारत कोई डंपिंग मार्केट नहीं है : राम माधव

Oct
21 2019

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस के दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव राम माधव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फोरम के दौरान माधव व राइस के बीच शाब्दिक युद्ध देखने को मिला। राइस ने कहा था कि भारत के रिश्ते अमेरिका की तुलना में चीन के साथ बेहतर हैं।

यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) को संबोधित करते हुए माधव ने कहा कि भारत एक डंपिंग मार्केट (जहां कोई भी अपना सामान फेंक दे) नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देकर देश एक व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरे।

भाजपा की विदेश नीति के एक प्रमुख चेहरे माधव राइस की उपस्थिति में अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर वार्षिक शिखर सम्मेलन में अपना संबोधन दे रहे थे।

उन्होंने कहा, रक्षा, संचार, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा प्रमुख क्षेत्र हैं, और आज हमारे पास व्यापारिक लाभ से परे व्यापारिक संबंधों की साझेदारी के लिए सबसे अच्छा दिमाग है। चीन भारत का करीबी पड़ोसी है और हमें वैश्विक और क्षेत्रीय दबावों से परे बढ़ती साझेदारी को देखने की जरूरत है।

माधव ने कहा, जिस तरह से भारत और चीन दोनों आगे बढ़ रहे हैं, हमें प्रतिस्पर्धी होने और इस क्षेत्र में सभी तरीकों से संसाधनों का उपयोग करने की भी आवश्यकता है। मैं यह स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि आज चीन-भारत संबंध अमेरिका-भारत संबंधों से बहुत बेहतर हैं।

इसके बाद राइस ने भी माधव के बयान पर कटाक्ष किया। उन्होंने चेताते हुए कहा, चीन भारत के साथ गुरिल्ला युद्ध खेल रहा है। हर कोई इसे देख रहा है, लेकिन भारत अभी भी कई तरीकों से जुड़ना चाहता है। आज भारत को सभी क्षेत्रों में विकास के लिए निजी क्षेत्र के साथ जुड़ने की जरूरत है, और उन्हें यह देखने की जरूरत है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने कैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का उपयोग किया। साथ ही विकास के बुनियादी ढांचे को एक साथ विकसित और मजबूत किया।

माधव ने कहा कि अमेरिका व भारत के बीच व्यापार को संतुलित करने की जरूरत है।

माधव ने कहा, भारत और अमेरिका के बीच हमारी व्यापार साझेदारी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। लेकिन एक बात जिसे अमेरिका को समझने की आवश्यकता है, वह यह है कि हम एक डंपिंग बाजार नहीं हैं। सिर्फ इसलिए कि हमारे पास एक बड़ी आबादी है। यह सरकार चाहती है कि भारत घरेलू बाजार व एफडीआई को आगे बढ़ाते हुए ट्रेडिंग हब के तौर पर उभर कर सामने आए।

राइस ने कहा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था के साथ बहुत कुछ करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा इसे दी गई कम रेटिंग के कारण कई चुनौती भी है।

--आईएएनएस

Related Articles

Comments

 

झारखंड के चुनाव परिणाम बिहार राजग पर डालेंगे असर!

Read Full Article
0

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive