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अपने कामों से अलग पहचान बनाई महिला आईएएस कल्पना श्रीवास्तव ने

May
02 2020

रानी शर्मा

कहावत है कि किसी व्यक्ति के कहीं पहुंचने से पहले ही उसके द्वारा किये गए कार्यों की चर्चा पहुँच जाती है। ये कहावत प्रतिभाशाली आईएएस अधिकारी कल्पना श्रीवास्तव पर सटीक बैठती है. करीब 15 साल से इनके द्वारा किये गए कार्यों को नजदीक से देखने के बाद मुझे ये कहने में न कोई संकोच है और न ही कोई अतिश्योक्ति होगी कि कल्पना श्रीवास्तव को मध्यप्रदेश सरकार ने जब भी और जिस भी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है, वहां उन्होंने अपने कार्यों से अपनी विशेष छाप छोड़ी है। नौकरी तो सभी अधिकारी करते है लेकिन नौकरी के दौरान ही जनता के हित में कई नई योजनाएं बनाकर उनको लागू करने में कल्पना श्रीवास्तव का कोई जवाब नहीं है।

बात महिला बाल विकास की हो या तकनीकी शिक्षा या भोपाल कमिश्नर बनने का सफर। हर जगह उनके कार्यों से उनकी पहचान होती रही है। भोपाल की पहली महिला कमिश्नर के रूप में एक साल पहले उन्होंने पदभार ग्रहण किया था और आज उनको कमिश्नर पद से हटाकर सचिवालय भेजे जाने पर सभी को आश्चर्य हो रहा है कि कमिश्नर के रूप में बेहतरीन कार्य करने वाली अफसर को अचानक कोरोना काल में क्यों हटाया गया ? जबकि उन्होंने इस कोरोना लॉक डाउन में भोपाल की जनता की सुविधाओं का ख्याल रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। निश्चित ही सरकार इस योग्य और ईमानदार अफसर को कोई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने वाली होगी। भोपाल में एक साल में कमिश्नर के रूप में उन्होंने अपनी जो छाप छोड़ी है. वो बहुत अद्भुत है भोपाल की सूरत बदलने में उनका बहुत बड़ा योगदान जनता को याद रहेगा। हरियाली फ़ैलाने वाली कमिश्नर ने एक साल में करीब 11 लाख 25 हजार से ज्यादा पौधे जनता के सहयोग से लगाए। ख़ास बात ये है कि वो अपनी योजनाओं में जनता को बहुत सहज - सरल तरीके से शामिल कर लेती है, जिससे जनता भी खुद को गौरवांवित महसूस करती है। उनके कैरियर में जनता के हित में किये गए कार्यों को याद किया जाए तो एक किताब बनने में देर नहीं लगेगी।

आज उनके बारे में इतना इसलिए लिख पा रही हूँ क्योंकि उनके काम को बहुत नजदीक से मैंने देखा है। कल्पना श्रीवास्तवजी से मेरी पहली मुलाकात करीब 15 साल पुरानी है जब वो महिला बाल विकास में पदस्थ थी। तब मैं दैनिक भास्कर में रहते हुए महिला बाल विकास की भी रिपोर्टिंग करती थी। उस दौरान उनकी महिलाओं के हित में लागू की गई कई योजनाओं की राष्ट्रीय स्तर तक तारीफ़ हुई। श्रीमती श्रीवास्तव प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन के द्वारा महिला बाल विकास में रहते हुए प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण एवं फ्लैगशिप योजना लाडली लक्ष्मी और महिलाओं - बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए मंगल दिवस योजना प्रारंभ की गई थी, जिसके तहत महिलाओं की गोद भराई, बालिका का जन्म दिवस, अन्नप्राशन गणवेश वितरण आदि कार्यक्रम मंगलवार को किये जाने का निर्धारण किया गया था। वर्ष 2009 में इनका स्थानांतरण महिला बाल विकास विभाग से अन्य विभाग में कर दिया गया था।

वर्ष 2012 में उन्होंने पुनः संचालनालय महिला सशक्तिकरण की कमान आयुक्त की हैसियत से संभाली, क्योंकि महिला सशक्तिकरण को महिला एवं बाल विकास विभाग से 2012 में ही पृथक किया गया था। जिसमें उस समय स्टाफ की अत्यधिक कमी थी, साथ ही महिलाओं से संबंधित योजनाएं प्रारंभ करने के लिए नए आयाम भी थे। वर्ष 2013 में श्री श्रीवास्तव ने बाल विवाह रोकथाम के लिए लाडो अभियान प्रारंभ किया और 2 वर्ष में इस अभियान से सैकड़ों बाल विवाह रोके गए। आज प्रदेश का प्रत्येक नागरिक बाल विवाह के कानूनों से लाडो अभियान के माध्यम से ही परिचित है। लाडो अभियान के लिए मध्यप्रदेश शासन को प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

प्रदेश में महिला हिंसा-सामाजिक हिंसा की रोकथाम एवं महिलाओं से संबंधित योजनाओं का प्रचार प्रसार जन समुदाय के माध्यम से ही किया जाना बेहतर विकल्प था. इस बात को ध्यान में रखते हुए कल्पना श्रीवास्तव द्वारा शौर्य दल बनाए गए थे। उक्त शौर्य दल मैं महिला एवं पुरुष की भागीदारी बराबर की रखी गई एवं ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया गया जिनके द्वारा सामाजिक कार्य में स्वरुचि थी। शौर्य दल के प्रभाव से 2 साल में महिला हिंसा एवं सामाजिक हिंसा के आंकड़ों में गिरावट आई। शौर्य दल को भी टाइम्स ऑफ इंडिया अवार्ड से नवाजा गया एवं अन्य राज्यों ने भी शौर्या दल को रिप्लिकेट किया, इनके द्वारा शौर्य दल को पहचान दिलाने के लिए एवं प्रोत्साहित करने के लिए राज्य के प्रत्येक जिलों में शौर्य दल की परेड भी प्रारंभ की, परंतु इनके विभाग से जाते ही शौर्य दल का स्वरूप बिल्कुल बदल गया।

कल्पना श्रीवास्तव के द्वारा शुरू किये गए कार्यों की लिस्ट बहुत लम्बी है। उन्होंने महिला बाल विकास में ही रहते हुए पीड़ित महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण हेतु मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना भी प्रारंभ की । जन समुदाय की सामाजिक कार्यों में हिस्सा बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री सामाजिक नेतृत्व योजना शुरू की, जिसमें ग्राम ब्लॉक एवं जिला स्तर पर बीएसडब्ल्यू के कोर्सेज प्रारंभ किए गए थे।

महिला संरक्षण अधिनियम को समस्त राज्यों के द्वारा एक अधिनियम जैसा लागू किया गया, परंतु मध्य प्रदेश में इसको एक योजना का प्रारूप देते हुए उषा किरण योजना के नाम से प्रारंभ किया, इस योजना की तर्ज पर भारत सरकार के द्वारा समस्त राज्यों में वन स्टॉप सेंटर खोले गए। आईसीपीएस के अंतर्गत दत्तक ग्रहण को पारदर्शी बनाए जाने के लिए भी श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव का बहुत बड़ा योगदान रहा. इनके द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर को भारत सरकार के द्वारा अपनाया गया और उसके लिए मध्यप्रदेश शासन को भारत सरकार के द्वारा आईटी अवार्ड से भी नवाजा गया।

सबसे प्रेमपूर्वक मिलने वाली कल्पना जी की पहचान ही उनके व्यवहार और कार्य से होती आई है। बहुत कम अधिकारी ऐसे होते है, जो अपने हर कार्य से जनता को इस तरह जोड़ लेते है कि जनता को वह कार्य अपने परिवार का कार्य लगने लगता है। किसी भी विभाग के कोई भी अधिकारी या कर्मचारी का छोटे से छोटा काम भी श्रीमती श्रीवास्तव के द्वारा ऐसे किया जाता है, जैसे वो उनका उनका व्यक्तिगत कार्य हो, अपने स्टाफ को सहयोग करने के लिए तो उनका कोई जवाब ही नहीं है अपने स्टाफ को साथ में लेकर चलने का जो जुनून और जज्बा उनमें दिखता है. बहुत कम अधिकारियों में होता है। मैंने देखा है कि वो अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने साथ पूर्ण सहयोग से उनकी समस्त समस्याओं को साथ लेते हुए एक परिवार के समान चलती हैं, उनकी नजरों में ना कोई छोटा अधिकारी है ना कोई बड़ा अधिकारी है, कोई भी उनसे काम के सिलसिले में किसी भी वक्त मिल सकता है।

अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के काम की व्यस्तताएं बहुत होती हैं फिर अगर अधिकारी कल्पना श्रीवास्तव हों जिनके काम करने के अंदाज को मैंने ऊपर लिखा है तो आप इनकी व्यस्त दिनचर्या को बेहतर समझ सकते हैं. लेकिन व्यस्तता के बीच भी रचनात्मकता और कलाधर्मिता के लिए समय चुरा लेना कल्पना श्रीवास्तव से सीखा जा सकता है. कल्पना जी संगीत में विशेष रूचि रखती हैं इसीलिए जब मौक़ा होता है तब बेहतरीन अंदाज में गाने भी गाती हैं.

ऐसी साफ़ - स्वच्छ छवि की महिला अधिकारी कल्पना श्रीवास्तव को मेरी शुभकामनाएं है कि उनकी यही कार्य की गति सदा बनी रहे और जिस भी विभाग में जाएँ हमेशा जनता के हितों को प्राथमिकता देती रहें। भोपाल कमिश्नर के रूप में भोपाल का अपने परिवार की तरह ख्याल रखने वाली कल्पना जी के योगदान को जनता आसानी से भूल नहीं पाएगी । वास्तव में आज जनता के दुखदर्द को अपना दुख महसूस करके उसे दूर करने के लिए गंभीर ईमानदार प्रयास करने वाले ऐसे अधिकारियों की समाज को बहुत जरूरत है।

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रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

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