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वोट की खातिर मनमाने निर्णय ले रही भाजपा सरकारें..

Apr
21 2020

रानी शर्मा

देश में कोरोना संकट लगातार गहराता जा रहा है लेकिन भाजपा सरकारें ऐसे समय में भी मनमाने निर्णय लेने से बाज नही आ रही हैं. उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कोटा में पढ़ रहे छात्रों को बुलाने के बाद अब मप्र सरकार भी इसी राह पर चल पड़ी है।

मप्र की भाजपा सरकार ने कोटा में पढ़ रहे मप्र के 2500 छात्रों को वापस बुलाने के लिए करीब 150 बसें कोटा के लिये भेजी है..! जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोना की रोकथाम के लिए बताए गए नियमों का खुला उल्लंघन है ! वहीँ प्रधानमंत्री के निर्देशों का भी मख़ौल उड़ाने जैसा है.

मप्र में लगातार कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद मप्र की स्थिति गभीर होती जा रही है, ऐसे में कोरोना नियंत्रण करने की बजाय कोटा से छात्रों को लाया जा रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री के लॉक डाउन के नियमों की धज्जियां भाजपा सरकार वाले राज्य ही उड़ा रहे हैं । असल में कोटा में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की कोचिंग करने के लिए रहने वाले बच्चे सम्पन्न वर्ग से ही आते हैं। जिनके भाजपा सरकार के नेताओं से जाहिर है कि अच्छी जानपहचान होगी । ऐसे में सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है, इसके लिए भाजपा कार्यालय से सोशल मीडिया पर संदेश जारी करके बच्चों के माता-पिता से संपर्क करने को कहा गया, बच्चों को लेने के लिए 21अप्रैल को 150 बसें भोपाल से रवाना की जा रही हैं।

अब सवाल ये उठता है कि अगर कोरोना काल में महामारी की चिंता किये बिना राज्य सरकारों द्वारा सम्पन्न वर्ग को इतनी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है फिर उन मजदूरों को भी उनके घर पहुंचा देते जो सड़कों के किनारे अलग-अलग जिलों में पड़े हुए हैं और पैदल ही अपने घरों के लिए जा रहे हैं।

सवाल ये है कि देश हित पहले है कि राजनीति? स्पष्ट है कि इस दौर में देश हित ही सबसे पहले होना चाहिए लेकिन भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री इन नियमों की अवहेलना करने में सबसे आगे है. इन हालातों में आम जनता को विचार करना होगा कि बिना वैज्ञानिक चेतना के कोरोना को नियंत्रण करना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन है. देश के अंदर भी कोरोना को लेकर नियम कायदे इसीलिए देर से लागू किये गए, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा की सीट पाने के लिए अचानक जनसेवा की याद आ गई और वो कांग्रेस को छोड़कर अचानक भाजपा में चले गए. इसका नतीजा ये हुआ कि भाजपा ने मप्र की सत्ता हासिल करने के लिए कोरोना नियंत्रण पर ध्यान ही नहीं दिया। पहले कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सरकार बचाने में लगे रहे और दूसरी ओर भाजपा सरकार बनाने में लगी रही और इसी बीच प्रदेश की जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया. इसी का नतीजा है की मध्यप्रदेश देश के पहले पांच राज्यों में और देश के दस शहरों में से दो मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर कोरोना प्रभावित वालों में हैं.

इसका नतीजा आज देश भुगत रहा है. यही राजनीति अभी भी जारी है उपचुनाव के लिये सम्पन्न वर्ग से चंदा तब ही मिल सकता है जब उनको सेवा दी जाए. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भाजपा सरकार आम जनता की नहीं बल्कि अमीर वर्ग की सरकार है क्योंकि कोरोना काल में सड़कों पर भूखे-प्यासे अपने घरों के लिए पैदल चलते मजदूरों को देखकर इनकी सरकारों के पास उपलब्ध बसों के पहिये जाम हो गए थे. लेकिन सम्पन्न वर्ग के लिये बसें दौड़ने लगी । ये ही असली चेहरा है भाजपा की राजनीति का, जिसके लिए देश हित में कोरोना से लड़ना उतना जरूरी नहीं है जितना सत्ता सुख।

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रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

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