Kharinews

कोरोना इलाज भ्रष्टाचार : शिवराज सरकार ने चिरायु अस्पताल को दिए करोड़ों रुपये

Jun
07 2020

मप्र सरकार सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में करा रही कोरोना का इलाज, याचिका दाखिल

रानी शर्मा

भोपाल : 7 जून/ कोरोना मरीज़ों के इलाज के नाम पर मध्य प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करके निजी अस्पतालों को करोड़ों रुपए बांट रही है ,जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं । इस विषय में भोपाल के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। जिसमें गुरुवार तक सुनवाई होने की संभावना है। 

ये जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता भुवनेश्वर मिश्रा की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में एडवोकेट प्रशांत चौरसिया ने  दाख़िल की है। रिट पिटीशन NP 8092/2020 में कहा गया है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा गलत तरीके से नियम विरूद्ध कोरोना के मरीजों के नाम पर चिरायु अस्पताल के मालिक अजय गोयनका (जो व्यापम  कांड के आरोपी भी है ) को करोड़ों रूपये का भुगतान किया जा रहा है जबकि भोपाल में कई बड़े सरकारी अस्पताल मौजूद है। शिवराज सरकार ने राजधानी में शुरू से ही कोविड 19 के मरीजों के भर्ती उपचार का सेंटर चिरायु मेडिकल कॉलेज भैंसा खेड़ी भोपाल और बंसल अस्पताल शाहपुरा भोपाल को बनाया है जबकि ये केंद्र सरकार के नियमों के पूरी तरह विरुद्ध है। भोपाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज का हमीदिया अस्पताल है, जहां प्रशिक्षित कई डॉक्टर मौजूद हैं। शासन द्वारा हमीदिया अस्पताल के चिकित्सको को करोड़ों रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है।  इसी प्रकार भोपाल में एम्स और भोपाल मेमोरियल अस्पताल भी है। इन सभी शासकीय अस्पतालों में शासन द्वारा करोड़ों रुपए स्पेशलिस्ट चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को वेतन भी दिया जाता है।  परन्तु भयंकर महामारी में विधिवत तौर पर  इन शासकीय अस्पतालों का पूरा इस्तेमाल शासन द्वारा जानबूझकर नहीं किया जा रहा है , बल्कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा कोविड 19 की महामारी में संक्रमित व्यक्तियों के उपचार के लिए निजी अस्पताल भोपाल में बैरागढ़ स्थित चिरायु अस्पताल और शाहपुरा स्थित बंसल  अस्पताल को अधिकृत किया गया है ।

याचिका में कहा गया है कि चिरायु अस्पताल भैंसा खेड़ी बैरागढ़ भोपाल में बड़े तालाब भोपाल की लाइफ लाइन फुल टैंक भूमि पर विधि विरुद्ध बना है। इस अस्पताल को विधि विरुद्ध तरीके से भोपाल के बड़े तालाब के फुल टैंक वाटर एरिया की लगभग 30 एकड़ जमीन को लीज पर प्रदान किया गया था जो विवादों का केंद्र भी है जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान व चिरायु अस्पताल के मालिक अजय गोयंका के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट द्वारा अपराध दर्ज करने (FIR )के आदेश भी दिए गए थे ।

याचिकाकर्ता मिश्रा का कहना है कि यह तथ्य पूरी तरह प्रमाणित करते हैं कि चिरायु अस्पताल के मालिक अजय गोयनका और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घनिष्ठता के चलते नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल को सुविधाएं प्रदान की जा रही है। समाचार पत्रों के माध्यम से यह भी ज्ञात हुआ है कि अस्पताल में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग ₹5400 का खर्चा शासन द्वारा अस्पताल को दिया जाता है। यह सर्व विदित है कि कोविड19 महामारी का अभी तक कोई इलाज व्यवस्थित रूप से नहीं बनाया गया है। इन अस्पतालों में पॉजिटिव आने वाले मरीजों को 15 दिवस या कम दिन भर्ती रखकर केवल प्रोटीन -कैलोरी आदि की सस्ती दवाइयां दी जाती है और साधारण प्रकृति का खाना दिया जाता है। जिसका अधिकतम व्यक्ति प्रतिदिन 2100 रुपये से अधिक का खर्चा नहीं आता, परंतु मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5400 रुपये प्रति व्यक्ति के रूप में इन अस्पतालों को दिया जाना गंभीर भ्रष्टाचार अपराध को प्रकट करता है , जबकि भोपाल में सरकार के 3 बड़े अस्पताल हमीदिया, एम्स और भोपाल मेमोरियल स्थित है। जहां पर समुचित तरीके से कोविड19 के मरीजों का उपचार किया जा सकता है , परंतु ज्यादा भ्रष्टाचार करने के उद्देश्य से प्राइवेट अस्पतालों को सेंटर बनाया गया है। भोपाल में ही लगभग 50 से अधिक निजी अस्पताल भी मौजूद है परंतु शासन द्वारा बिना किसी नीतिगत फैसले के बिना किसी मापदंड के चिरायु अस्पताल और बंसल अस्पताल को ही कोविड 19 के मरीजों को भर्ती करने का सेंटर बनाया गया है, इन निजी अस्पतालों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा रियायती दर पर भूमि गरीब असहाय मरीजों का इलाज करने के आशय से कम दरों पर  लीज पर  दी गई है । ऐसी स्थिति में यह दोनों अस्पताल प्रबंधन अपराधिक सांठगांठ  भ्रष्टाचार कार्य कर शासन से संक्रमित व्यक्तियों के समान्य इलाज का खर्चा प्रतिदिन 5400 रुपये वसूल कर रहे हैं । अपितु  निजी व्यक्तियों से इलाज के नाम पर भारी-भरकम लाखों रुपयों की राशि भी  ली जा रही है , जिसे रोका जाना आवश्यक है, क्योंकि इन दोनों निजी अस्पताल ने  शासन से रियायती दर पर भूमि लीज़ पर प्राप्त की है और शासन से अनुदान भी लेते है,  इस कारण कोरोना मरीजों के उपचार का खर्चा शासन से या निजी व्यक्तियों से नहीं लिया जाना चाहिए । कोरोना महामारी पीड़ितों का इलाज निशुल्क या कम दरों पर किया जाना चाहिए, क्योंकि मध्यप्रदेश शासन द्वारा इन अस्पताल  प्रबंधन को कोरोना संक्रमित व्यक्ति के उपचार के रूप में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 5400 रुपये अदा किए जा रहे हैं यह राशि आम जनता से विभिन्न करों के रूप में ली गई राशि ही है जनता का अहित हो रहा है।

एडवोकेट प्रशान्त चौरसिया ने बताया कि इस रिट पिटीशन के माध्यम  से उच्च न्यायालय से मांग की गयी है कि चिरायु अस्पताल एवं बंसल अस्पताल को मध्यप्रदेश शासन द्वारा कोबिट 19 महामारी के दौरान मध्यप्रदेश शासन द्वारा अब तक किये गए संपूर्ण भुगतान की निष्पक्ष किसी बड़ी जांच एजेंसी से स्वतंत्र  जांच कराई जाए । भ्रष्टाचार कार्य करने वाले दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए तथा कोबिट 19 महामारी के मरीजों का उपचार भोपाल स्थित शासकीय अस्पतालों में ही किए जाने की व्यवस्था की जाये। याचिका पर सुनवाई 10 से 11 जून तक होने की संभावना एडवोकेट चौरसिया ने बताई है।

Category
Share

About Author

रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

Related Articles

Comments

 

ओलंपिक क्वालीफाई करने में लगे पहलवानों की चुनौती बढ़ी : बजरंग

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive