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"शिव-राज" में आंकड़ों की बाजीगरी, क्या पड़ेगी कोरोना पर भारी ? कई गुना ज्यादा निकल सकते हैं मरीज

Jun
11 2020

कोरोना आंकड़ों के साथ बच्चों जैसा खेल रहा स्वास्थ्य विभाग

रानी शर्मा

भोपाल 11 जून/ मध्यप्रदेश में कोरोना तेजी से लगातार फैल रहा है लेकिन प्रदेश सरकार आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त है। सरकार को लगता है कि आंकड़े घुमा फिरा कर प्रस्तुत करने से शायद कोरोना कम नजर आएगा, अब तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 427 मौतें और दस हजार से ज्यादा कोरोना पॉज़िटिव मामले सामने आ चुके हैं फिर भी सरकार ऐसे प्रयास नहीं कर रही जिससे कोरोना पर नियंत्रण हो पाए। सूत्रों के अनुसार अगर उचित तरीके से जांच की जाए तो करोना पॉजिटिव और मौत के आंकड़े  सरकारी आंकड़ों से लगभग कई गुना ज्यादा निकल कर सामने आएंगे।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मध्यप्रदेश में 3 जून तक कोरोना से पीड़ित मरीजों का डेटा मरीजों की ज्यादा-कम संख्या के हिसाब से जिलेवार प्रस्तुत किया जाता था,जिससे सबसे ज्यादा कोरोना पीड़ित जिला इंदौर सबसे ऊपर और सबसे कम पीड़ित जिले नीचे रहते थे, लेकिन 4 जून से जारी हेल्थ बुलेटिन में अल्फ़ावेटिकली A to z के हिसाब से जिलों के नाम व्यवस्थित करके कोरोना मरीजों के आँकड़े प्रस्तुत करने शुरू किये गए, ताकि मरीजों के आँकड़े एक नजर में और एक साथ भयावह नज़र न आ जाए, फिर 8 जून से वापस रिपोर्ट पुराने फॉर्मेट में बनाई जाने लगी । इसे सरकार की बच्चों के बचपने वाली हरक़त ही कहा जा सकता है।

संभवतः मप्र सरकार को लगता है , कोरोना मरीजों की रिपोर्ट में संख्या ऊपर नीचे करने से शायद मीडिया को कंफ्यूज किया जा सकता है। कहावत है कि "बिल्ली को देखकर कबूतर के आँखे बंद करने से बिल्ली कबूतर को छोड़ नहीं देती"। यही हाल प्रदेश में कोरोना के मरीजों की स्थिति को लेकर है ! आंकड़ों की बाजीगरी करने से मामाजी कोरोना नियंत्रित नहीं हो जाएगा । बुधवार 10 मई तक प्रदेश में 427 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है और 10049 पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा सामने आ चुका है।

राजधानी में कोरोना का इलाज करने वाले अस्पतालों के विश्वनीय सूत्रों का कहना है कि इस सरकारी बुलेटिन में बताए जा रहे आंकड़ों से कई गुना ज्यादा कोरोना के मरीज अस्पतालों में पहुँच रहे हैं ,परंतु सरकार का दवाब कम से कम पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा उजागर करने के लिए रहता है। बड़े पैमाने पर सेंपल रिजेक्ट किये जाते है ताकि कोरोना पॉजिटिव आंकड़ा कम सामने आये।  

विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में इन दिनों ऐसे मरीज जो हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, ब्लड प्रेशर ,शुगर से पीड़ित आते हैं और उनकी मौत हो जाती है तब भी उनकी कोरोना की जांच नहीं की जाती। इस बात की संभावना है ऐसे तमाम मरीज जिनकी अस्पताल में आकर मौत हो रही है अगर उनके सैंपल लेकर जांच की जाए, तब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी।

इससे सोसाइटी में फैले कोरोना को सामने लाया जा सकता है और रोकथाम की जा सकती है लेकिन सिर्फ कुछ मरीजों की जो सर्दी खांसी जुकाम के लक्षण के साथ स्वयं अस्पताल जांच कराने पहुंच रहे हैं, उनकी कोरोना जांच की जा रही है इस कारण वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है। अगर सबकी जाँच की जाएं तो कोरोना पॉजिटिव और मौत के मामले वर्तमान आंकड़ों से कई गुना ज्यादा निकलेंगे।

सरकार द्वारा कोरोना मामलों की जानकारी मीडिया तक पहुंचाने के लिये जब मीडिया बुलेटिन की शुरुआत अप्रैल में की गई थी, तब कोरोना से संबंधित विस्तृत जानकारी मीडिया बुलेटिन में देने की शुरुआत की गई थी। उसमें प्रदेश में 11 लैब होने की बात बताई गई थी,जिसमें मात्र 2050 लोगों की ही एक दिन में कोरोना से जाँच होने की क्षमता बताई गई थी। करीब 15 हजार जांच सेम्पल की रिपोर्ट का दिल्ली की लैब से आने की बात बताई गई थी।

इस तरह सैकडों मरीजों की तो जाँच रिपोर्ट का अभी तक पता ही नहीं है, इसी तरह काल सेंटर में आने वाले ज्यादातर फोन काल भूख-प्यास से पीड़ित परेशान लोगों के आते थे। करीब 70 प्रतिशत फोन काल ऐसे ही रहते थे लेकिन इस तरह की जानकारी का पैटर्न 4 दिन में ही बदल दिया गया ताकि लोगों को कोरोना से संबंधित सच्चाई कम से कम पता चल सके। 

कोरोना काल में अपनी नौकरी बचाना पहली प्राथमिकता किसी के लिए भी है, इसी बात का फायदा सरकार उठा रही है। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग का अमला पूरे प्रदेश में इस समय बहुत दबाव में काम करने के लिए मजबूर है, कोई भी डॉक्टर , अधिकारी, कर्मचारी इस मामले में अपना नाम सामने नहीं आने देना चाहता क्योंकि किसी का भी नाम सामने आने पर उसका तबादला किया जा सकता है या फिर सेवा ठीक नहीं करने के आरोप लगाकर सस्पेंड भी किया जा सकता है , क्योंकि कांग्रेस से सत्ता छीनने वाली भाजपा सरकार इस समय आगामी विधानसभा उपचुनाव में 24 विधानसभा सीट जीतने के लिए कोई भी कसर बाकी नहीं रखना चाहती।

आखिरकार क्या वजह है कि शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही कोरोना के आँकड़े प्रदेश में लगातार बढ़ते ही जा रहे है । प्रदेश में ढाई महीने पहले कोरोना के मामले इस हद तक नहीं बढ़े थे । उज्जैन इंदौर जैसे एक -दो जिलों में कोरोना के मामले उजागर हुए थे तब इनको कंट्रोल करने पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि 23 मार्च को शपथ लेने के बाद 29 दिन तक मुख्यमंत्री सिर्फ अकेले ही सरकार चला रहे थे, लेकिन देखते देखते प्रदेश के 51 जिलों तक कोरोना ने पैर पसार लिए और सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए कोई विशेष रणनीति नहीं बना पाई, उल्टे सरकार ने लगातार ऐसे कार्य किए जिससे कोरोना के मामले प्रदेश में लगातार बढ़ते ही गए।

सरकार का ध्यान बस उपचुनाव जीतने पर है, जनता को कोरोना से बचाने पर नहीं है। अगर होता तो प्रदेश में लॉक डाउन लगाना चाहिए था, लेकिन मप्र में तो सरकार की प्राथमिकता शराब बेचने में है और चुनाव में ज्यादा से ज्यादा वोट पाने की व्यवस्था करने में है। अब मात्र 6 व्यक्ति सरकार चला रहे है है। पाँच मंत्री और एक मुख्यमंत्री है। 

वास्तव में अब तक ऐसी कोई बीमारी नहीं हुई थी, जिसमें मीडिया अस्पतालों के अंदर की खाक छानकर खबर ना ला पाया हो लेकिन कोरोना जैसी खतरनाक महामारी के बीच वास्तव में सही खबर बाहर निकलना मुश्किल है इसी बात का फायदा सरकार उठाकर जनता को गुमराह कर रही है।

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रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

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