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मप्र में 'किसान कर्जमाफी' पर सियासी किच-किच तेज

Aug
23 2019

संदीप पौराणिक
भोपाल, 23 अगस्त (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में अच्छी मानसूनी बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं, मगर राजनीतिक दल किसानों की आड़ में सियासी लाभ न मिलने को लेकर दुबले हुए जा रहे हैं। यही कारण है कि बीज, खाद की बात छोड़कर कर्जमाफी के मुद्दे को हवा में उछाला जा रहा है। भाजपा जहां सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर सरकार को बड़े-बड़े इश्तिहार जारी कर सफाई देनी पड़ रही है।

राज्य में एक खबर फैली कि सरकार ने किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था, मगर नया प्रारूप बन रहा है, और इसके मुताबिक, जिन किसानों पर दो लाख रुपये से अधिक यानी दो लाख एक रुपये तक का कर्ज होगा, ऐसे किसानों को जय किसान फसल ऋणमाफी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

इस खबर के फैलते ही भाजपा ने हमलावर रुख अपना लिया। यह देख सरकार से जुड़े लोगों की सांसें फूलने लगीं। हर तरफ से सफाई देने का सिलसिला शुरू हुआ। शुक्रवार को सरकार को तमाम अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन जारी करने पड़े।

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने वचनपत्र में किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था। कमलनाथ ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए एक घंटे के भीतर किसान कर्जमाफी के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस योजना की प्रक्रिया शुरू हुई और किसानों से तीन रंग के अलग-अलग फॉर्म भरवाए गए। सरकार ने 55 लाख किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था, जिस पर 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भार आने का अनुमान है।

सरकार की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि अब तक 20 लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ किया जा चुका है। इन किसानों के कर्ज की 7000 करोड़ की राशि माफ की गई है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने किसान कर्जमाफी को लेकर कहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा कर्जमाफी को लेकर बनाया गया नया प्रारूप किसानों को ठगने का नया प्रयास है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्जमाफी को लेकर एक के बाद एक कई प्रारूप लेकर आ रही है। पहले लाल, पीले, हरे, नीले फॉर्म भरवाए गए। अब कुछ नए नियमों के साथ नए प्रारूप सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर कमलनाथ सरकार किसानों को ठगने का एक नया रास्ता ढूंढकर लाई है, क्योंकि ऐसा करने से उसे समय मिलता चला जाएगा। लेकिन प्रदेश के किसानों में कांग्रेस सरकार के खिलाफ भयंकर असंतोष है। प्रदेश में किसानों के हितों की लगातार अनदेखी हो रही है।"

दो लाख रुपये तक के कर्जदार किसानों का ही कर्ज माफ होने की बात फैलने पर सरकार और संगठन को सामने आना पड़ रहा है। कृषि मंत्री सचिन यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "जो पार्टी किसानों के कर्जमाफी को असंभव बताती थी, उसे कर्जमाफी रास नहीं आ रही है, यही कारण है कि वे भ्रम फैलाने में लगे हैं।"

किसानों की कर्जमाफी को लेकर बढ़ रहे भ्रम पर सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ को किसानों के नाम चिट्ठी लिखकर तस्वीर साफ करनी पड़ी है। अखबारों में पूरे पेज के इश्तिहार के तौर पर जारी खुली चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने कहा है कि चुनाव के समय किए गए वादे के मुताबिक किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा, इसमें सहकारी और राष्टीयकृत दोनों तरह के बैंकों का चालू व कालातीत कर्ज शामिल है। लोकसभा चुनाव तक थोड़े से ही समय में 20 लाख किसानों का सात हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा चुका था। पिछली सरकार खजाना खाली छोड़कर गई थी, और दो साल से विभिन्न योजनाओं के तहत बकाया राशि का भी भुगतान किया जाना था।

मुख्यमंत्री की किसानों के नाम चिट्ठी में जिलेवार कर्जमाफी पाने वाले किसानों की संख्या का भी ब्यौरा दिया गया है। कर्जमाफी में हो रही देरी के कारणों का जिक्र करने के साथ कहा है कि किसानों की कर्जमाफी की वर्तमान स्थिति ज्ञात करने की भी अलग से व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे। उन्होंने कहा है कि कर्जमाफी योजना के साथ किसानों को लाभ पहुंचाने वाली अन्य योजनाओं पर भी सरकर विचार कर रही है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की किसानों के नाम लिखी चिट्ठी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि किसानों को चिट्ठी नहीं, कर्जमाफी चाहिए।

किसान कर्जमाफी के मसले पर भाजपा जहां राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में है, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार की कोशिश है कि किसानों में किसी तरह का असंतोष न पनपे और सरकार के सामने कोई चुनौती न आए।

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