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बिहार : पितरों के मोक्ष के लिए अर्पित पिंड से बनेगी खाद

Sep
14 2019

मनोज पाठक
पटना, 14 सितंबर (आईएएनएस)। देश-विदेश में मोक्षस्थली के नाम से चर्चित बिहार के गया में पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किए गए पिंडदान की सामग्री से अब खाद बनेगी। इसके लिए गया में विशेष रूप से पांच मशीनें मंगवाई गई हैं।

जिला प्रशासन का कहना है कि पिंडदान के लिए गया में पितृपक्ष मेलों में लोगों द्वारा किए गए पिंडदान की सामग्रियां अक्सर जहां-तहां फेंक दिया जाता था या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है और क्षेत्र में गंदगी भी फैलती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

ऐसी व्यवस्था पटना के पुनपुन नदी के किनारे भी की गई है। यहां पड़ने वाले पिंडदान सामग्री का पटना में ही खाद बनाया जाएगा।

गया के पितृपक्ष मेला-2019 का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने गुरुवार को किया था। पुनपुन में पटना नगर निगम, फुलवारीशरीफ और मसौढ़ी नगर परिषद के अधिकारियों को पिंड सामग्रियों को इकट्ठा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि गया में यह काम गया नगर निगम को सौंपा गया है।

पुनपुन से प्रत्येक दिन औसतन दो से तीन टन पिंडदान सामग्री निकलती है, जबकि गया में इसकी मात्रा कहीं अधिक होती है। हिंदू परंपरा के मुताबिक, गया में पिंडस्थानों पर पिंडदान के पहले पहला पिंड पुनपुन नदी के किनारे दिए जाने का प्रावधान है।

गया के जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने आईएएनएस को बताया कि गया में पिंड सामग्री से खाद बनाने के लिए विष्णुपद में तीन और अक्षयवट में दो ग्रीन कंपोस्टर लगाए गए हैं। इसकी क्षमता पांच सौ किलोग्राम की है। इसमें पांच क्विंटल कचरा और पिंड (आटा) डालने पर एक क्विंटल जैविक खाद बनेगी।

उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान काफी मात्रा में पिंड व गीला कचरा निकलता है। इस वर्ष पिंडदान के लिए आठ लाख से ज्यादा लोगों के यहां आने का अनुमान है।

जिलाधिकारी ने कहा कि पिंड में आमतौर पर आटा, जौ, तिल, गुड़, चावल व फूल का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर एक स्थान पर पिंडदान करने के दौरान 16 पिंड दिए जाते हैं। ऐसे में बड़ी मात्रा में सामग्री यत्र-तत्र फेंके जाते थे। इससे गंदगी फैलती थी। अब इन पिंडों को प्रतिदिन एकत्र किया जाएगा और उससे खाद बनाए जाएंगे। खाद की पैकेजिंग की जिम्मेदारी नगर निगम को दिया गया है।

पटना में पुनपुन तट पर प्रतिदिन पूरे पितृपक्ष में पिंडदानियों की काफी भीड़ जुटती है।


पटना के कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिंडदान सामग्री को एक जगह एकत्रित करने के बाद उसे जमीन में गड्ढा (किट) बनाकर डाला जाएगा। सामग्री के साथ बैक्टीरिया कल्चर बनाने वाला पाउडर भी मिलाया जाएगा। इससे फूल, माला, आटा आदि के सड़ने पर दरुगध नहीं आएगी। 45 से 60 दिनों में खाद तैयार जाएगी। नाइट्रोजन, पोटैशियम और कैल्शियम युक्त यह खाद पौधों के पोषण और विकास के लिए काफी उपयोगी होगा।

उन्होंने कहा कि पहले पिंड की सामग्री नदी में प्रवाह कर दी जाती थी। इससे नदी में प्रदूषण बढ़ता था। प्रत्येक दिन पिंड सामग्री को पिंडस्थल से हटाया जाएगा और उसे एकत्रित कर उससे खाद बनाई जाएगी।

इस वर्ष पितृपक्ष 14 सितंबर से शुरू हो रहा है।

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